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नालासोपारा में बेकाबू भीड़ का पुलिस पर हमला: मिर्च पाउडर फेंककर की मारपीट, दो जवान घायल
नालासोपारा में बेकाबू भीड़ का पुलिस पर हमला: मिर्च पाउडर फेंककर की मारपीट, दो जवान घायल अंडरकवर एडिटर न्यूज़ चैनल, १८ अप्रैल, २०२६. ठाणे: Nalasopara के बावखल इलाके में शनिवार को कानून व्यवस्था को चुनौती देने वाली एक सनसनीखेज घटना सामने आई, जहां एक उग्र भीड़ ने पुलिस पर हमला कर दिया। प्रदर्शन के दौरान भीड़ ने न केवल पुलिस पर मिर्च पाउडर फेंका, बल्कि लाठी-डंडों से भी हमला किया, जिसमें दो पुलिसकर्मी घायल हो गए। जमीन विवाद से शुरू हुआ बवाल प्राथमिक जानकारी के अनुसार, यह पूरा विवाद जमीन के मुद्दे से जुड़ा हुआ है। कुछ लोगों ने कथित रूप से एक व्यक्ति की जमीन पर कब्जा करने के प्रयास में प्रशासन पर दबाव बनाने के लिए सड़क जाम कर दिया। इस दौरान Mumbai-Ahmedabad Highway पर अचानक बड़ी संख्या में लोग इकट्ठा हो गए, जिससे यातायात भी प्रभावित हुआ। पुलिस पर अचानक हमला स्थिति को नियंत्रित करने के लिए जब पुलिस मौके पर पहुंची, तो भीड़ ने आक्रामक रुख अपना लिया। पुलिस द्वारा समझाने की कोशिश के बावजूद भीड़ ने सुनने से इनकार कर दिया और अचानक मिर्च पाउडर फेंकते हुए हमला शुरू कर दिया। इस हमले में पुलिसकर्मी हेमराज वाघेरे और शुभम उगले घायल हो गए। इसके अलावा, अंकित उपाध्याय नामक व्यक्ति को भी भीड़ ने पीटा। इलाके में तनाव, पुलिस की सख्त कार्रवाई घटना के बाद पूरे इलाके में तनाव का माहौल बन गया। घायलों को तुरंत अस्पताल में भर्ती कराया गया। Mandvi Police Station ने मामले को गंभीरता से लेते हुए आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है और उनकी तलाश जारी है। पुलिस का कहना है कि जल्द ही सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया जाएगा। निष्कर्ष यह घटना न केवल कानून व्यवस्था पर सवाल उठाती है, बल्कि यह भी दिखाती है कि छोटी-छोटी बातों पर भीड़ किस तरह हिंसक रूप ले सकती है। प्रशासन ने लोगों से शांति बनाए रखने और कानून का पालन करने की अपील की है।
🚨 Mumbai Police की बड़ी कार्रवाई: NESCO कॉन्सर्ट ड्रग मौत मामले में सातवां आरोपी गिरफ्तार
🚨 Mumbai Police की बड़ी कार्रवाई: NESCO कॉन्सर्ट ड्रग मौत मामले में सातवां आरोपी गिरफ्तार मुंबई: Mumbai Police ने गोरेगांव स्थित NESCO कॉन्सर्ट में ड्रग ओवरडोज से हुई दो छात्रों की मौत के मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए सातवें आरोपी को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार आरोपी का संबंध एक बड़े मादक पदार्थ तस्करी नेटवर्क से बताया जा रहा है। अधिकारियों ने जानकारी दी कि आरोपी को देर रात हिरासत में लिया गया और जल्द ही उसे अदालत में पेश किया जाएगा। इस मामले में अब तक कुल सात लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है, जबकि मुख्य आरोपी की तलाश जारी है। जांच में सामने आए चौंकाने वाले खुलासे पुलिस जांच में पता चला है कि कॉन्सर्ट के दौरान ही नहीं, बल्कि उससे पहले भी बड़े पैमाने पर ड्रग्स का सेवन किया गया था। यह कॉन्सर्ट NESCO Centre में आयोजित हुआ था, जहां कई छात्रों ने कथित रूप से मादक पदार्थों का सेवन किया। जांच के अनुसार, ड्रग्स की सप्लाई Kalyan से मुंबई लाई गई थी, जिसे कुरियर और अन्य माध्यमों से छात्रों तक पहुंचाया गया। MDMA ड्रग का इस्तेमाल पुलिस ने बताया कि इस मामले में MDMA (जिसे ‘एक्स्टेसी’ या ‘मॉली’ भी कहा जाता है) का इस्तेमाल किया गया। मृत छात्रों ने कथित रूप से चार गोलियां 6,400 रुपये में खरीदी थीं। जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी आनंद पटेल और प्रतीक पांडे इस ड्रग नेटवर्क के प्रमुख सदस्य थे। पटेल ने ड्रग्स की सप्लाई की, जबकि पांडे ने छात्रों के बीच उसका वितरण किया। कॉन्सर्ट में खुलेआम ड्रग्स की एंट्री पुलिस के अनुसार, एक अन्य आरोपी को यह जानकारी थी कि लोग ड्रग्स लेकर कार्यक्रम में आ रहे हैं, फिर भी उन्हें अंदर जाने दिया गया। इससे सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। एक महिला छात्रा, जो फिलहाल इलाज के अधीन है, ने अपने बयान में बताया कि उसने कॉन्सर्ट के दौरान MDMA की गोली ली थी, जिसके बाद उसे कुछ भी याद नहीं है। SIT और पुलिस टीमों की जांच जारी मामले की गंभीरता को देखते हुए कई पुलिस टीमें इस पूरे नेटवर्क की जांच में जुटी हैं। अधिकारियों का कहना है कि यह मामला केवल एक घटना तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके तार बड़े ड्रग सिंडिकेट से जुड़े हो सकते हैं। निष्कर्ष यह घटना न केवल युवाओं में बढ़ते ड्रग्स के चलन को उजागर करती है, बल्कि बड़े आयोजनों में सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था की कमियों को भी सामने लाती है। पुलिस का कहना है कि पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश होने तक जांच जारी रहेगी।
🚨 Tata Consultancy Services नासिक विवाद: अंडरकवर पुलिस जांच में यौन शोषण, दबाव और धार्मिक प्रभाव के आरोप उजागर
🚨 Tata Consultancy Services नासिक विवाद: अंडरकवर पुलिस जांच में यौन शोषण, दबाव और धार्मिक प्रभाव के आरोप उजागर अंडरकवर एडिटर न्यूज़ चैनल, १४ अप्रैल, २०२६. नासिक/नई दिल्ली: Nashik स्थित Tata Consultancy Services (TCS) के एक बीपीओ यूनिट में चल रहे कथित अनियमितताओं के मामले ने अब गंभीर रूप ले लिया है। अंडरकवर पुलिस जांच में यौन शोषण, मानसिक दबाव और धार्मिक प्रभाव जैसे गंभीर आरोप सामने आने के बाद इस मामले में अब तक 9 प्राथमिकी (FIR) दर्ज की जा चुकी हैं और 7 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। गुप्त पुलिस ऑपरेशन से खुला मामला पुलिस के अनुसार, फरवरी माह में मिली एक शिकायत के आधार पर इस मामले की गुप्त जांच शुरू की गई। इसके तहत पुलिसकर्मियों ने हाउसकीपिंग स्टाफ के रूप में बीपीओ यूनिट में तैनात होकर करीब दो सप्ताह तक गतिविधियों पर नजर रखी। इस दौरान कर्मचारियों के बीच हो रही बातचीत और व्यवहार का निरीक्षण किया गया, जिससे प्रारंभिक शिकायतों की पुष्टि हुई। इसके आधार पर मार्च में देओलाली पुलिस स्टेशन में पहली FIR दर्ज की गई। यौन शोषण और दबाव के गंभीर आरोप शिकायत के अनुसार, एक महिला कर्मचारी ने अपने सहकर्मी पर शादी का झांसा देकर दुष्कर्म करने का आरोप लगाया। साथ ही उस पर अपनी वैवाहिक स्थिति छिपाने और धार्मिक प्रथाओं को प्रभावित करने का भी आरोप है। जांच के दायरे के बढ़ने के साथ अन्य कई महिला कर्मचारियों (उम्र 18–25 वर्ष) ने भी यौन उत्पीड़न, अनुचित व्यवहार और मानसिक दबाव के आरोप लगाए। पुलिस ने बताया कि कई मामलों में कार्यस्थल पर अनुचित टिप्पणियां, छेड़छाड़ और निजी व धार्मिक निर्णयों को प्रभावित करने के प्रयास शामिल हैं। 9 FIR, 7 गिरफ्तार, SIT जांच जारी 26 मार्च से 3 अप्रैल के बीच कुल 9 FIR दर्ज की गईं। इन मामलों में भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत दुष्कर्म, यौन उत्पीड़न, पीछा करना, और धार्मिक भावनाएं आहत करने जैसे गंभीर आरोप शामिल हैं। अब तक 7 आरोपियों—जिनमें वरिष्ठ कर्मचारी और एक महिला HR अधिकारी भी शामिल हैं—को गिरफ्तार किया जा चुका है, जबकि एक आरोपी अभी फरार है। पूरे मामले की जांच के लिए विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया गया है, जो सभी पहलुओं की गहराई से जांच कर रहा है। POSH नियमों पर भी उठे सवाल जांच में यह भी देखा जा रहा है कि क्या कंपनी ने कार्यस्थल पर महिलाओं के संरक्षण से जुड़े POSH (Prevention of Sexual Harassment) कानून के प्रावधानों का सही पालन किया था या नहीं। पुलिस के अनुसार, यदि मौखिक शिकायतें भी सामने आई थीं, तो कंपनी को तत्काल कार्रवाई करनी चाहिए थी। कंपनी का रुख और बचाव पक्ष की दलील इस मामले पर Tata Consultancy Services ने सख्त रुख अपनाते हुए ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति की बात कही है और जांच में पूरा सहयोग देने का आश्वासन दिया है। वहीं, आरोपियों के वकीलों ने इन आरोपों को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया गया बताया है। उनका कहना है कि सामान्य कार्यस्थल बातचीत और व्यक्तिगत आचरण को गलत तरीके से आपराधिक रूप दिया जा रहा है। निष्कर्ष यह मामला न केवल कॉर्पोरेट कार्यस्थलों पर सुरक्षा और पारदर्शिता की आवश्यकता को उजागर करता है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि समय रहते की गई जांच और सतर्कता से गंभीर अपराधों का पर्दाफाश संभव है।
🚨 अशोक खरात केस में बड़ा खुलासा: IAS के बाद दो वरिष्ठ महिला पुलिस अधिकारी भी जांच के घेरे में
🚨 अशोक खरात केस में बड़ा खुलासा: IAS के बाद दो वरिष्ठ महिला पुलिस अधिकारी भी जांच के घेरे में नाशिक: के बहुचर्चित अशोक खरात मामले में अब चौंकाने वाले खुलासे सामने आ रहे हैं। कथित भोंदू बाबा अशोक खरात पर शिकंजा कसते हुए Enforcement Directorate (ईडी) ने राज्यभर में उसकी संपत्तियों पर छापेमारी तेज कर दी है। इस कार्रवाई के बीच अब कई बड़े अधिकारियों के नाम भी सामने आने लगे हैं, जिससे पूरे Maharashtra में हड़कंप मच गया है। महिला पुलिस अधिकारियों पर भी सवाल सूत्रों के मुताबिक, एक आईएएस अधिकारी के बाद अब दो वरिष्ठ महिला पुलिस अधिकारी भी जांच के दायरे में आ गई हैं। बताया जा रहा है कि ये दोनों अधिकारी अशोक खरात के संपर्क में थीं। इनमें से एक अधिकारी डीसीपी (उप पुलिस आयुक्त) और दूसरी एसीपी (सहायक पुलिस आयुक्त) स्तर की बताई जा रही है। इस खुलासे के बाद पुलिस विभाग में हलचल तेज हो गई है और इन अधिकारियों की भूमिका को लेकर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। क्या पोस्टिंग के लिए लिया सहारा? जांच एजेंसियां इस पहलू की भी गहराई से पड़ताल कर रही हैं कि क्या इन अधिकारियों ने मनचाही पोस्टिंग पाने के लिए खरात से संपर्क किया था। साथ ही, संभावित आर्थिक लेन-देन की भी जांच की जा रही है। यदि यह आरोप सही पाए जाते हैं, तो मामला और गंभीर हो सकता है। फर्जी बैंक खातों का जाल इस बीच, पुलिस द्वारा अशोक खरात के नाशिक स्थित ठिकाने पर की गई छापेमारी में बड़ी संख्या में आधार कार्ड और पैन कार्ड बरामद हुए हैं। शुरुआती जांच में यह सामने आया है कि इन दस्तावेजों के जरिए करीब 131 फर्जी बैंक खाते खोले गए हो सकते हैं। यह खुलासा सामने आते ही पुलिस और प्रशासनिक तंत्र में हड़कंप मच गया है। SIT कर रही गहन जांच फिलहाल, अशोक खरात को न्यायालय ने 8 अप्रैल तक पुलिस हिरासत में भेज दिया है। मामले की जांच के लिए विशेष जांच दल (SIT) गठित किया गया है, जो हर पहलू की गहराई से जांच कर रहा है। निष्कर्ष अशोक खरात मामला अब केवल एक धोखाधड़ी का मामला नहीं रह गया है, बल्कि इसमें प्रशासन और पुलिस तंत्र की संभावित संलिप्तता के संकेत मिल रहे हैं। आने वाले दिनों में इस केस में और बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है, जिस पर पूरे राज्य की नजर बनी हुई है।

